कुम्भकार चले आधुनिकरण की ओर

संजय कुमार पाल की रिपोर्ट
बिहार: प0 चम्पारण बगहा अनुमंडल अंतर्गत क्षेत्र के कुम्भकारो द्वारा दीपावली एवं छठ के मौके पर बनाये जाने वाले मिट्टी के दीपक, कोसा, घड़ा, कुंडेसर, हाथी, मिट्टी के बर्तन इत्यादि बनाने के लिए शिल्पकार नहीं मिल रहे है, कारण मिट्टी के शिल्पकारो को बढती महंगाई में  उनके द्वारा बनाए गए सामानों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिसके चलते अधिकतर मिट्टी के शिल्पकार अपने पुश्तैनी व्यवसाय को छोड़कर रोजी रोटी के लिये दूसरे कार्यो में लग गए हैं, इसीलिए कुम्भकारो ने मोटर से संचालित चाक और मिट्टी गुथने वाले मशीन से मिट्टी के समान बना रहे हैं, शिल्पकारों से पूछने पर उनलोगों ने बताया कि क्या करे, घर के नई पीढ़ी के बच्चे इस कार्य को नहीं करना चाहते हैं, हमलोग अपना पुश्तैनी व्यवसाय छोड़ भी नहीं सकते, इसलिये शिल्पकारो की  कमी के चलते आधुनिक संयंत्र से सामानों का निर्माण कर रहे हैं।

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