सुपुर्द - ए - ख़ाक हुये ऐo केo नदवी मदनी
एम. ए. हक
कुशीनगर: जनपद कुशीनगर तथा देवरिया के उलमाओ व आम जनता मे गम का माहौल चल रहा है क्योकि एक बहुत ही बड़े और नेक आलिमे दिन को खोया गया है, जिसकी भरपाई शायद ही हो पाये उनके न रहने का गम हम सभी को हमेशा खलता रहेगा कौमी नायब सदर मुस्लिम पॉलिटिकल कौन्सिल ऑफ़ इंडिया और मदरसा रहमनिया इस्लामियाँ सेमरा व उमर फारूक कसया के संस्थापक और वर्तमान मे जामिया रहमनिया इस्लामियाँ के नाजिम व धर्म गुरु मैलाना अहमद कमाल अबदुर्र रहमान नदवी मदनी का (24/04/2026)को इंतकाल (मृत्यु )हो गयी है l
इन्ना लिल्लाहे व इन्ना अलैहे राजऊन
आपको बताते चले कि मौलाना का जन्म सेमरा हर्दो पडरौना कुशीनगर उत्तर प्रदेश मे हुआ उनकी प्रारम्भिक शिक्षा अलग अलग जगहों पर उत्तर प्रदेश मे ही हुआ l लेकिन ज़ब उन्होने प्रदेश मे प्रथम स्थान हासिल किये तो उच्चय शिक्षा के लिये अपना मुल्क छोड़ना पड़ा और उन्होने मुल्के सऊदी अरब का रुख किया और उन्होने वहा पर अपनी तालीमी मयार जारी रखी और एक बहुत बड़े आलिम -ऐ - दिन बन कर उभरे और सबसे बड़ी बात ये है कि सऊदी अरब सरकार हर तरह से सुविधा मुहैया कराई थी लेकिन मौलना का दिल अपने मुल्क हिंदुस्तान के लिए धड़क रहा था इसलिए उन्होंने बहुत सारे कश्मो कश के बाद मौलाना अंतिम फैसला लिया कि वह अपने इल्म से अपने मुल्क वालों को रोशन तथा उनकी खिदमत करेंगे आखिर वह हिंदुस्तान आये फिर उन्होने उत्तर प्रदेश के ही जिला कुशीनगर कसया मे कुछ अपने साथियो के साथ मिलकर माशावरा करके एक बहुत बडा इदारा का इंतखाब किया जिसका नाम जामिया उमर फारूक रखा और लोगो से मिलना जुलना शुरू कर दिये दिन रात एक करके अपने खून पसीना बहाकर मदरसे कि तामीर करायी लेकिन अच्छे काम मे रोड़ा आता ही है वैसे ही मौलाना के काम मे भी आया लोगो ने उनको बुरा भला कहा लेकिन मौलाना को दिन कि खिदमत करना था पीछे मूड कर नहीं देखे, फिर क्या हुआ वही हुआ जो मंजूर -ऐ - खुदा था इस इदारे की इतनी खिदमत की कि इस मदरसे बुलंदी आसमान कि उचाईयो तक पहुंच गयी, फिर उन्होने एक अरशे गुजरने के बाद सोचा क्यों न अपने मूल निवास पर एक और इदरा कायम किया जाये फिर उन्होने अपने मूल निवास सेमरा हर्दो कटकुइया मे मदरसा रहमनिया इस्लामियाँ के नाम से इदारा और नर्सरी कायम किया इस मदरसे को भी आसमान के उचाईयो तक ले जाना था इसलिए उन्होने दिलो जान से यहाँ भी मेहनत किया और रोजाना कसया से सेमरा आना जाना लगा रहा लेकिन जितना बनाना चाहते थे उतना नहीं हो पाया, अपनी आख़िरी वक़्त तक मदरसे के बानी नाजिम बने रहे l अब देखने कि ये बात है कि इस मदरसे को उस उचाईयो कौन पंहुचाता है??
बहरेहाल -
उनके नामजे ज़नाजा मे कुशीनगर व देवरिया से बड़े -बड़े उलमा तथा हजारों की संख्या मे लोग एकत्रित हुये, उनके नमाज़े जनाज़ा देखने व पढ़ने के लिये लोगो का जन सैलाब उमड़ गया था, उनके जनाज़े की नमाज उनके पहला मदरसा उमर फारूक कसया मे हुआ, उनका नेमाजे जनाज़ा पढ़ाने के लिये लखनऊ नदवा से मौलाना रहमतुल्लाह नदवी नेपाली तशरीफ़ लाये थे l लोगो के दिलो पर राज करने वाले मौलाना अब इस दुनिया मे नही रहे l
मदरसा रहमनिया इस्लामियाँ स्कुल के प्रधानाचार्य व हंगामा टाइम्स कुशीनगर के व्यूरो चीफ सदरे आलम ने विनम्र आँखों से श्रद्धांजलि दी और उनके लिये दुआ-ऐ- की और उसके बाद सदरे आलम मिडिया से रुबोरूह होते हुये बताया कि मौलाना हमेशा कौम की खिदमत करने के लिये तैयार रहते और कौम का दर्द हमेशा रहता था,उनके दिल मे रहता, और मुल्क के खिदमत के लिये हमेसा तैयार रहते और मुल्क की तरक्की के लिये समय समय अपने विचारों को मिडिया के जरिये सरकार को पहुंचते रहते लेकिन मौलना को एक चीज हमेसा खलती रही कि अपने ही मुल्क हिंदुस्तान मे कुछ लोगो के द्वारा एक विशेष समुदाय को टारगेट किया जाता है उनको हमेशा ये दर्द रहता था कि ऐसा क्यों होता ये देश यहां के सभी लोगो का है। अब उनके न रहने बाद उनके किये गये कार्यों को जारी रखना और उसका देख भल करना बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है।
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