कहीं यह परिवार की आड़ में राजनीति की चौखट पर दस्तक तो नहीं- अतुल मलिकराम
एम. ए. हक सोनू सूद एक ऐसा नाम, जो अभिनय क्षेत्र में नाम कमाने के साथ ही साथ कोविड काल में एक फरिश्ते के रूप में उभरकर सामने आया। भूखों का पेट भरा, हालातों के कारण अपने शहर से दूर लोगों को घर पहुँचाया, जरूरतमंदों को मुफ्त राशन दिया, जरूरत की तमाम वस्तुएँ बाँटीं, कोरोना मरीजों के इलाज की व्यवस्था की, और फिर पूरी दुनिया में मसीहा के नाम से मशहूर हुए सोनू सूद ने आज भी इन नेक कामों का सिलसिला जारी रखा है। उनके नेक कामों के चर्चे उतने ही मशहूर हैं, जितना कि उनका नाम। वह कहते हैं न कि इंसान उसके कर्मों से ही पहचाना जाता है। सोनू ने भी समाज की भलाई करने के चलते अपनी कुछ ऐसी ही छाप छोड़ी है। लगभग हर एक भारतीय यही चाहता है कि वे इन नेक कामों को भविष्य में भी जारी रखें और जरूरतमंदों के हमेशा काम आते रहें। लेकिन हालिया समय में मसीहा द्वारा परिवार की आड़ में जो राजनीति का जामा पहना जा रहा है, यह लोगों के मन में डर के रूप में पनप रहा है कि कहीं उनका मसीहा खो न जाए बहन को सियासी घमासान में उतारने के बाद सोनू का राजनीति में आने का फैसला हर तरफ चर्चा का मुद्दा बना हुआ है। अपनी अलग पार्टी...